BCCI ने फिर की 700 घरेलू क्रिकेटरों के साथ अनदेखी, कहा- ‘भुगतान के मुद्दे पर फिर करेंगे चर्चा’

BCCI ने फिर की 700 घरेलू क्रिकेटरों के साथ अनदेखी, कहा- ‘भुगतान के मुद्दे पर फिर करेंगे चर्चा’- ऐसा लगता है कि…

BCCI ने फिर की 700 घरेलू क्रिकेटरों के साथ अनदेखी, कहा- 'भुगतान के मुद्दे पर फिर करेंगे चर्चा'
BCCI ने फिर की 700 घरेलू क्रिकेटरों के साथ अनदेखी, कहा- 'भुगतान के मुद्दे पर फिर करेंगे चर्चा'

BCCI ने फिर की 700 घरेलू क्रिकेटरों के साथ अनदेखी, कहा- ‘भुगतान के मुद्दे पर फिर करेंगे चर्चा’- ऐसा लगता है कि बीसीसीआई को अपने घरेलू क्रिकेटरों की दुर्दशा की ज्यादा परवाह नहीं है। 700 से अधिक क्रिकेटर अपने मुआवजे के फैसले के लिए बीसीसीआई की एसजीएम का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। लेकिन मीटिंग के दौरान यह मामला चर्चा में भी नहीं आया।

ये भी पढ़ें- IPL 2021 Phase 2 in UAE: क्रिकेट वेस्टइंडीज के पास पहुंचा बीसीसीआई, CPL के शेड्यूल को बदलने का किया अनुरोध

“एसजीएम आईपीएल 2021 और टी 20 विश्व कप के बारे में था जिस पर चर्चा की गई है। लेकिन मुआवजे के हिस्से को एक अलग बैठक की जरूरत है। हमें निर्णय लेने से पहले स्टेट एसोसिएशन के साथ चर्चा करनी होगी, ”अरुण धूमल ने InsideSport को बताया।

कई खिलाड़ी पूरी तरह से घरेलू क्रिकेट पर निर्भर रहते हैं। खासकर रणजी ट्रॉफी पर। क्योंकि इससे खिलाड़ियों को सबसे अधिक पैसे मिलते हैं। 2019-20 सीजन में कर्नाटक की रणजी ट्रॉफी टीम का हिस्सा रहे वी कौशिक से InsideSport ने बात की।

 ‘हम कोरोना महामारी के कारण घरेलू क्रिकेट नहीं खेल पा रहे हैं। इसकी वजह से कई लोग आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं। मैं भाग्यशाली हूं कि मेरे पास सरकारी नौकरी है। लेकिन फिर भी इस वजह से मेरे जैसे कई खिलाड़ियों पर काफी असर पड़ा है जिनके पास आईपीएल अनुबंध(contract) नहीं है।’ रणजी ट्रॉफी में कर्नाटक के लिए खेलने वाले वी. कौशिक ने InsideSport को बताया।

कोरोना महामारी के कारण घरेलू क्रिकेट नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर कई खिलाड़ियों और स्टेट एसोसिएशन ने मुआवजे की मांग की थी। कई खिलाड़ी इन्हीं पैसो पर निर्भर हैं। खिलाड़ियों के मुआवजे पर फैसला शनिवार की SGM मीटिंग में होने वाला था। मीटिंग में जब हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन ने इस मुद्दे को उठाया, तो इसे बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली और उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने खारिज कर दिया।

BCCI SGM: इसके अलावा कोरोना के कारण ही कर्नाटक प्रीमियर लीग (KPL) और तमिलनाडु प्रीमियर लीग (TNPL) जैसे राज्य T20 लीग भी नहीं हो पा रहे हैं। इससे भी खिलाड़ियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

“केपीएल जैसे टूर्नामेंट के कारण हमे अच्छे पैसे मिलते थे। इन टूर्नामेंट के कारण खिलाड़ियों का चयन राज्य की टीमों और यहां तक कि आईपीएल में भी होता है। लेकिन कोरोना के कारण यह भी बंद है। इसके कारण मुश्किल और बढ़ गई है। ऐसा लगता है कि हम प्रवाह खो रहे हैं, ”वी. कौशिक ने InsideSport को बताया।

गुजरात के एक क्रिकेटर ने InsideSport को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि बीसीसीआई जल्द ही फैसला करेगा।

“छोटे घर से आने वाले क्रिकेटरों के लिए State contract बहुत फायदेमंद होता है। कर्नाटक के एक अन्य क्रिकेटर ने InsideSport को बताया कि हम वित्तीय लाभों पर ज्यादा विचार किए बिना बेहतर क्रिकेट खेल सकते हैं।

अपना नाम नहीं बताने के शर्त पर बंगाल के एक वरिष्ठ क्रिकेटर ने कहा- “हमारे पास एक छोटा घरेलू सीजन था। हमारे पास सफेद गेंद वाले दो टूर्नामेंट (विजय हजारे और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी) थे लेकिन इन सब से ज्यादा  रणजी महत्वपूर्ण है। मुझे उम्मीद है कि यह इस साल जल्द ही होगा। एक State contract वास्तव में मददगार होता है,” उन्होंने InsideSport को बताया।

बता दें, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने विभिन्न मामलों पर चर्चा के लिए शनिवार को एक वर्चुअल स्पेशल जनरल मीटिंग (SGM) बुलाई। मीटिंग में आईपीएल 2021 को प्राथमिकता मिली साथ ही आईसीसी टी 20 विश्व कप पर भी एक संक्षिप्त चर्चा हुई। वहीं, मीटिंग में घरेलू खिलाड़ियों पर भी चर्चा होने वाली थी। लेकिन बीसीसीआई ने उनपर कोई चर्चा नहीं की। BCCI ने रणजी ट्रॉफी 2020-21 के लिए खिलाड़ियों के मुआवजे पर चर्चा करने से इनकार कर दिया। बीसीसीआई महिला क्रिकेटरों के साथ जैसा व्यवहार करती है, उन्होंने वैसा ही व्यवहार घरेलू क्रिकेटरों के साथ भी किया है।

महिला खिलाड़ियों को छह महीने से अधिक समय तक केंद्रीय अनुबंध (central contract) दिए बिना ही छोड़ दिया गया था साथ ही टी 20 विश्व कप में उन्हें आईसीसी द्वारा जो पुरस्कार राशि दी गई थी। उसे भी एक साल से अधिक समय तक खिलाड़ियों  में बांटा नहीं गया था।

Share This: