Wrestling
Wrestler Satender Malik Case: UWW ने सतेंद्र मलिक के मुकाबले में रेफरी जगबीर सिंह के फैसले को सही ठहराया

Wrestler Satender Malik Case: UWW ने सतेंद्र मलिक के मुकाबले में रेफरी जगबीर सिंह के फैसले को सही ठहराया

Wrestler Satender Malik Case: सतेंदर मलिक (Satender Malik) के खिलाफ 125 किग्रा राष्ट्रमंडल खेलों के ट्रायल (Commonwealth games Trials) मुकाबले की समीक्षा करते हुए टेक-डाउन कदम के लिए मोहित (Mohit Grewal) को दो अंक देने के रेफरी जगबीर सिंह (Refree Jagbir Singh) के फैसले को यूनाइटेड वर्ल्ड कुश्ती (UWW) रेफरी आयोग ने समर्थन दिया है […]

Wrestler Satender Malik Case: सतेंदर मलिक (Satender Malik) के खिलाफ 125 किग्रा राष्ट्रमंडल खेलों के ट्रायल (Commonwealth games Trials) मुकाबले की समीक्षा करते हुए टेक-डाउन कदम के लिए मोहित (Mohit Grewal) को दो अंक देने के रेफरी जगबीर सिंह (Refree Jagbir Singh) के फैसले को यूनाइटेड वर्ल्ड कुश्ती (UWW) रेफरी आयोग ने समर्थन दिया है और उनके द्वारा की गई समीक्षा को सही करार दिया है। सोशल मीडिया पर सतेंदर द्वारा पक्षपात का आरोप लगाने पर भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने इस मुकाबले का वीडियो यूडब्ल्यूडब्ल्यू रेफरी आयोग को भेजकर दूसरी राय मांगी थी। खेल की ताजा खबरों के लिए जुड़े रहिए- hindi.insidesport.in

WFI को 29 मई को UWW से जवाब मिला। UWW रेफरी आयोग के सदस्य एंटोनियो सिल्वेस्ट्री और इब्राहिम सिसिओग्लू ने वीडियो का विश्लेषण किया और निष्कर्ष निकाला कि ”रेफरी टीम ने अच्छा काम किया और सही पहलवान को बाउट का विजेता घोषित किया है।”

एक बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया था, जब कामनवेल्थ गेम्स के लिए चल रहे ट्रायल के दौरान निराश सतेंद्र मलिक ने एक रिव्यु के बाद रैफरी जगबीर को थप्पड़ जड़ दिया था। डब्ल्यूएफआई ने तब इस हमले के लिए सतेंदर पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि एक वीडियो के जरिए सतेंदर ने ये दावा किया था कि पहले हाथ रैफरी कि तरफ से उठा था और उन्होंने पक्षपात का आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की थी।

जगबीर ने पीटीआई को बताया था, ”उस दिन मुझे पता चल गया था कि मेरा फैसला सही है, मैंने अपनी पूरी जिंदगी या तो कुश्ती मुकाबलों को देखने या जज करने में बिता दी है। अब 32 साल हो गए हैं। मैं एक योग्य UWW रेफरी हूं और 2007 से मैं 15 विश्व चैंपियनशिप के लिए गया हूं।”

उन्होंने कहा था, “अब वायुसेना को फिर से सोचना चाहिए। वे उसे कुश्ती के लिए ले गए और अब उस पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आश्चर्य की बात थी कि वायु सेना ने अपने पहलवानों के साथ एक कर्मचारी भी नहीं भेजा।”

क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज (Google News) पर फॉलो करें।

Editors pick