Legends League Cricket 2022: दिल्ली उच्च न्यायालय ने Legends League Cricket पर रोक लगाने से किया इनकार

Legends League Cricket 2022: दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने ‘लीजेंड्स लीग क्रिकेट’ (Legends League Cricket) पर रोक लगाने से इनकार…

Legends League Cricket 2022: दिल्ली उच्च न्यायालय ने Legends League Cricket पर रोक लगाने से किया इनकार
Legends League Cricket 2022: दिल्ली उच्च न्यायालय ने Legends League Cricket पर रोक लगाने से किया इनकार

Legends League Cricket 2022: दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने ‘लीजेंड्स लीग क्रिकेट’ (Legends League Cricket) पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति क्रिकेट के खेल पर कॉपीराइट का दावा नहीं कर सकता है। एक व्यक्ति ने याचिका दायर करते हुए दावा किया था कि संन्यास ले चुके दिग्गज खिलाड़ियों की मौजूदगी वाले टूर्नामेंट (Legends League Cricket) का विचार उसने तैयार किया था, जिस पर अदालत ने यह फैसला सुनाया। आपको बतां दें, की भारत के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) निजी कारणों से लीजेंड्स लीग क्रिकेट (LLC 2022) के शुरुआती मैचों में नहीं खेल पायेंगे। खेल की ताजा खबरों के लिए जुड़े रहिए- hindi.insidesport.in

न्यायमूर्ति आशा मेनन (Justice Asha Menen) ने कहा कि वादी समीर कंसल प्रथम दृष्टया अंतरिम राहत का मामला पेश करने में विफल रहे और उनकी अवधारणा की कोई भी विशेषता मूल विचार नहीं लगती। समीर ने आरोप लगाया था कि प्रतिवादी लीजेंड्स लीग क्रिकेट (Legends League Cricket) के आयोजकों ने उनके विचार को चुराया है। न्यायमूर्ति (Justice Asha Menen) ने कहा कि वादी का विचार लंबे समय से सार्वजनिक रूप से मौजूद है और कोई भी इनमें से किसी विचार पर विशेष अधिकार का दावा नहीं कर सकता।

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Legends League Cricket 2022: न्यायमूर्ति मेनन ने साथ ही कहा कि लीजेंड्स लीग क्रिकेट (Legends League Cricket)  का प्रारूप वादी के विचार से काफी अलग है और प्रतिवादी आयोजक वादी के किसी विचार या प्रारूप की नकल नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि क्रिकेटरों को प्रतिवादी या किसी अन्य आयोजक की ओर से खेलने से नहीं रोका जा सकता क्योंकि वादी विशेष अधिकार का दावा नहीं कर सकता।

वादी के हितों की रक्षा के लिए हालांकि न्यायमूर्ति ने प्रतिवादी आयोजकों को निर्देश दिया कि वे ओमान में आयोजित मुकाबलों के संदर्भ में आय और खर्च का स्पष्ट खाता तैयार करें और लीग के मैच खत्म होने के एक महीने के भीतर इन्हें अदालत में जमा कराएं। अदालत ने कंसल की याचिका पर आयोजकों को समन जारी किया और कहा कि इस समय रोक का आदेश दिया जाता है तो प्रतिवादी, खिलाड़ियों, प्रायोजकों, मीडिया साझेदारों और जनता को होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकेगी। (भाषा)

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