BCCI President Tenure Extension: गांगुली-शाह के भविष्य पर फैसला, BCCI के संविधान संशोधन पर अगले हफ्ते सुनवाई

BCCI President Tenure Extension: बीसीसीआई ने अपने संविधान (BCCI Constitution) में संशोधन के लिए जल्द सुनवाई हेतु सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली है।…

BCCI President Tenure Extension: बीसीसीआई की अर्जी पर अगले हफ्ते सुनवाई के लिए राजी हुआ सुप्रीम कोर्ट, सौरव गांगुली और जय शॉ के भविष्य पर फैसला
BCCI President Tenure Extension: बीसीसीआई की अर्जी पर अगले हफ्ते सुनवाई के लिए राजी हुआ सुप्रीम कोर्ट, सौरव गांगुली और जय शॉ के भविष्य पर फैसला

BCCI President Tenure Extension: बीसीसीआई ने अपने संविधान (BCCI Constitution) में संशोधन के लिए जल्द सुनवाई हेतु सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली है। चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने इसको लेकर कहा कि अगर संभव हुआ तो अगले हफ्ते इस पर सुनवाई की जाएगी। दरअसल बीसीसीआई अपने कई नियमों में बदलाव चाहता है। अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में बीसीसीआई के खिलाफ फैसला लेता है तो सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) और जय शाह (Jay Shah Tenure) का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। चलिए जानते हैं इसके अलावा बीसीसीआई क्या कुछ बदलाव चाहता है। क्रिकेट (Cricket News Update) की ख़बरों के लिए Hindi.InsideSport.In

वर्तमान में बीसीसीआई के अध्यक्ष पद पर सौरव गांगुली, सचिव पद पर जय शाह, उपाध्यक्ष राजिव शुक्ल और अरुण धूमल कोषाध्यक्ष है। जयेश जॉर्ज संयुक्त सचिव है। सर्वोच्च न्यायालय की मान्यता प्राप्त बीसीसीआई के संविधान के अनुसार तो इनमे से कई अधिकारियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। 2020 में दाखिल एक याचिका के आधार पर इनमें वो अधिकारी अभी भी अपनी भूमिका में हैं, जिनका कार्यकाल खत्म हो चुका है।

अभी के बीसीसीआई संविधान के अनुसार हर वर्ष सितंबर के तीसरे शनिवार और रविवार को एनुअल जनरल मीटिंग होती है। इस बार चुनाव भी होंगे। पिछली बार (2019) मीटिंग में बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के बगैर अनुमति के ही संविधान में संशोधन किया था। इस बार बोर्ड अपने नए संविधान को लागू कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

यह भी पढ़ें- IND vs ENG LIVE: पैसों की वजह से विराट कोहली को टीम से ड्राप नहीं कर सकता BCCI- मोंटी पनेसर

BCCI President Tenure Extension : संशोधन नहीं तो खत्म हो गए गांगुली शाह का कार्यकाल

अभी बीसीसीआई ने संविधान के अनुसार कोई शख्स स्टेट क्रिकेट बोर्ड या बीसीसीआई में लगातार 6 वर्ष तक पदाधिकारी रहता है तो उसे 3 वर्ष के लिए कूलिंग ऑफ पर जाना होता है। इसके नियम के अनुसार उन वर्षों में व्यक्ति किसी पदाधिकारी पद पर या समिति में भी नहीं रह सकता है।

नए संविधान में बोर्ड चाहता है कि अगर कोई शख्स बोर्ड सिर्फ अध्यक्ष और सचिव पद पर 2 कार्यकाल पूरा करता है तब ही उसे 3 साल का कूलिंग ऑफ करना होगा। नए संविधान में इसमें स्टेट बोर्ड के कार्यकाल को शामिल नहीं किया गया है। अगर यह सुप्रीम कोर्ट में संसोधन नहीं होते हैं तो बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) और सचिव जय शाह (Jay Shah) को अपने पद से हटना होगा। आपको बता दें कि सौरव गांगुली इससे पहले क्रिकेट ऑफ़ बंगाल एसोसिएशन के अध्यक्ष और जय शाह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन संयुक्त सचिव पद पर कार्यरत थे।

आईसीसी में जाने के नियम में भी नए संविधान में बदलाव किया गया है। अभी जो संविधान है उसके अनुसार कोई नेता, गवर्नमेंट अधिकारी, सांसद और विधायक में शामिल शख्स बोर्ड का अधिकारी, किसी समिति का मेंबर, गवर्निंग कॉउन्सिल का मेंबर, आईसीसी का प्रतिनिधित्व नहीं हो सकता। अब जो नया संविधान बनाया गया है उसमे सांसद, विधायक और अन्य खेल संघ में शामिल को इससे छूट दी गई है। नए संविधान में बीसीसीआई के सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) की पावर को कम किया गया है, जबकि पहले इनकी पावर सबसे ज्यादा थी। नए संविधान के अनुसार सीईओ समेत अन्य लोग सचिव को रिपोर्ट देंगे।

नए संविधान में सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी की जरुरत नहीं

सुप्रीम कोर्ट की ओर से पारित बीसीसीआई संविधान में अभी एनुअल जनरल मीटिंग में मेंबर्स के वोट के बाद ही संविधान में संशोधन किया जाता है, लेकिन इस बाद भी बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेनी होती है नए बदलाव को लागू करने के लिए। नए संविधान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की अनुमति की जरुरत नहीं होगी।

क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज (Google News) पर फॉलो करें।

Share This: