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Tokyo Olympics: IOC ने एथलीटों से टोक्यो खेलों में COVID-19 वेवर फॉर्म पर हस्ताक्षर करने को कहा

Tokyo Olympics: IOC ने एथलीटों से टोक्यो खेलों में COVID-19 वेवर फॉर्म पर हस्ताक्षर करने को कहा

IOC ने एथलीटों से टोक्यो खेलों में COVID-19 वेवर फॉर्म पर हस्ताक्षर करने को कहा
Tokyo Olympics: टोक्यो जाने वाले एथलीटों को सबसे पहले एक वेवर फॉर्म पर हस्ताक्षर करना होगा, यह कहते हुए कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) जिम्मेदार नहीं होगी यदि वो टोक्यो ओलंपिक में COVID-19 या हीटवेव के चलते किसी भी स्वास्थ्य जोखिम या मृत्यु का सामना करते हैं. शुक्रवार को एथलीटों और प्रतिभागियों को एक विचित्र […]

Tokyo Olympics: टोक्यो जाने वाले एथलीटों को सबसे पहले एक वेवर फॉर्म पर हस्ताक्षर करना होगा, यह कहते हुए कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) जिम्मेदार नहीं होगी यदि वो टोक्यो ओलंपिक में COVID-19 या हीटवेव के चलते किसी भी स्वास्थ्य जोखिम या मृत्यु का सामना करते हैं. शुक्रवार को एथलीटों और प्रतिभागियों को एक विचित्र स्वास्थ्य वेवर फॉर्म भेजा गया था, जिसमें सभी को अपने “अपने जोखिम” पर खेलों में जाने की बात कही गई थी.

जापान के क्योडो न्यूज की ओर से टोक्यो खेलों में भाग लेने की शर्तों का विवरण देने वाला दस्तावेज प्राप्त किया गया. वेवर फॉर्म पर हस्ताक्षर करना आईओसी का एक असाधारण कदम है जो टोक्यो ओलंपिक आयोजित करने के बारे में शुरू से आश्वस्त रहा है.

गुरुवार को एथलीटों और ओलंपिक अधिकारियों के बीच एक वर्चुअल सम्मेलन के दौरान, आईओसी के सीओओ लाना हद्दाद ने उन्हें सूचित किया कि वेवर फॉर्म को COVID-19 से संबंधित शर्तों के साथ अपडेट किया गया है. भले ही IOC और आयोजन समिति ने अतिरिक्त उपायों के साथ एक सुरक्षित खेल का वादा किया है, COVID-19 दिशा निर्देश एथलीटों को भाग लेने के अपने निर्णय के लिए जवाबदेह होने के लिए कहते हैं.

हद्दाद ने कहा, “जैसा कि आपने COVID-19 पर दुनिया भर की खबरों को फॉलो किया होगा, कोई भी सरकार, कोई भी स्वास्थ्य प्राधिकरण संक्रमण के खिलाफ गारंटी नहीं ले रहा है या नहीं ले सकता है. यह एक ऐसा जोखिम है जिसे हम सभी को सहन करना हैं. वास्तव में यह पारदर्शिता रखने के लिए है और खेल के प्रतिभागियों से सूचित कर सहमति सुनिश्चित करता है.”

Tokyo Olympics: यह अजीब है और पहली बार आईओसी ने एथलीटों को इस तरह का कदम लेने के लिए कहा है. 2008 के बीजिंग ओलंपिक में भी, बीजिंग के वायु प्रदूषण के डर के बीच भी एथलीटों को इस तरह की छूट पर हस्ताक्षर करने के लिए नहीं कहा गया था. उस दौरान SARS का भी डर था.

जहां तक रियो ओलंपिक 2016 का सवाल है, तो जीका वायरस के डर से कई एथलीट बाहर हो गए थे, लेकिन फिर भी एथलीटों को इस तरह के छूट फॉर्म पर हस्ताक्षर करने के लिए नहीं कहा गया. स्वाइन फ्लू महामारी के बीच वैंकूवर शीतकालीन ओलंपिक भी ऐसी अधिसूचना के जारी नहीं की गई.

प्लेबुक ने कहा, “हमें विश्वास है कि निर्धारित उपायों से खेलों में भाग लेने में शामिल जोखिमों और प्रभावों को कम किया जाएगा, और हम उनका अनुपालन करने के लिए आपके समर्थन पर पूरी तरह से भरोसा करते हैं.”

साथ ही कहा, “हालांकि, सभी तरह की सावधानी बरतने के बावजूद, जोखिम और प्रभावों को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सकता है, और इसलिए आप अपने जोखिम पर ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों में भाग लेने के लिए सहमत हैं.”

हालांकि, यह पूछे जाने पर कि ऐसी वेवर क्यों दी गई, आईओसी के अध्यक्ष थॉमस बाक ने कहा कि यह मानक तरीका है.

हद्दाद ने कहा, “यह वास्तव में पारदर्शिता प्रदान करने और खेलों के प्रतिभागियों से सूचित कर सहमति सुनिश्चित करने के लिए है. प्रवेश फॉर्म अन्य सभी बड़े कार्यक्रम आयोजकों के मानक तरीके की तरह है. और अगर मैं जोड़ सकूं तो फॉर्म कानून के ढांचे के भीतर हैं.”

Tokyo Olympics: अन्य बातों के अलावा, प्लेबुक ने COVID-19 टेस्ट पर भी दिशा निर्देश प्रदान किए. एक एथलीट को जापान की यात्रा के 96 घंटे के भीतर दो टेस्ट कराने होंगे. इसके अलावा, एक बार फिर टोक्यो में, एथलीटों का ओलंपिक गांव में दैनिक आधार पर टेस्ट किया जाएगा.

जबकि COVID-19 महामारी पूरे जोरों पर है और जापान चौथी लहर के बीच में है, जापानी लोगों, वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने टोक्यो ओलंपिक का विरोध किया है. हालाँकि, IOC और जापानी ओलंपिक आयोजन समिति खेलों को “कोई भी हालत में” के मंचन पर आयोजित कर रही है.

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